होली क्यों मनाया जाता है? जानें पौराणिक कथाएं और महत्व

होली का त्यौहार हर भारतीय मनाता है लेकिन क्या आप मालूम है होली क्यों मनाया जाता है? होली भारत का एक प्रमुख त्यौहार है जो रंगों, उत्साह और खुशियों से भरा होता है। यह त्यौहार हर वर्ष फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है।

holi kyu manaya jata hai

ख़ासकर बच्चों का ये काफ़ी ज़्यादा प्रिय त्यौहार है दिवाली के बाद। भारत में होली विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग तरीकों से मनाई जाती है, लेकिन हर जगह में रंगों का उपयोग और जश्न मनाना सभी क्षेत्रों में एक समान ही होता है। आज के इस के आर्टिकल में हम होली कब, कैसे और क्यूँ के बारे में और विस्तृत में जानते हैं!

रंगों का त्योहार होली क्या है?

होली रंगों और उल्लास का त्योहार है। इस दिन लोग एक-दूसरे पर रंग डालते हैं और गले मिलते हैं। वैरभाव को भुलाकर प्रेम और आनंद का संदेश फैलाते हैं। गलियों में रंगोली बनाई जाती है और ठंडाई का आनंद लिया जाता है। घरों में गुजिया और मठरी जैसे मिठाइयां बनाई जाती हैं।

होली का रंग चारों तरफ फैल जाता है। रिश्तों में मिठास आ जाती है। लोग होलिका दहन की रस्म भी करते हैं। ये त्योहार आपसी प्रेम और भाईचारे का संदेश देता है।

त्योहारहोली
अन्य नामफगुआ, धुलेंडी, छारंडी (राजस्थान में), दोल
धर्महिन्दू, सिख, जैन और बौद्ध
आवृत्तिवार्षिक
आराध्यराधा-कृष्ण
संबंधित त्योहारहोला मोहल्ला, याओसांग
दिनफाल्गुन पूर्णिमा (सोमवार)
तारीख25 मार्च 2024

होली कब मनाया जाता है (When is Holi celebrated)

इस साल (2024 में) होली 25 मार्च को है। वैसे तो होली का त्यौहार हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह त्यौहार फरवरी या मार्च महीने में पड़ता है। हर साल होली की तारीख बदलती है।

होली मनाने के पीछे क्या कारण है?

होली मनाने के पीछे कई कारण हैं, जिनमें से कुछ मुख्य कारण हैं। आइए इन प्रमुख कारणों के बारे में जानते हैं।

बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न

होली का त्यौहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह त्यौहार प्रह्लाद और होलिका की कहानी से जुड़ा हुआ है, पहले कहानी के अनुसार, भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लिया था और हिरण्यकश्यप का वध किया था।

वहीं दूसरी कहानी में, वरदान का दुरुपयोग करते हुए होलिका ने अपने भतीजे प्रह्लाद के साथ अग्नि में प्रवेश कर लिया था। जिसके कारण होलिका अग्नि में जलकर भस्म हो गई थी। ये कहानियाँ हमें बुराई पर अच्छाई की जीत का पाठ पढ़ाती है।

वसंत ऋतु का आगमन

होली का त्यौहार वसंत ऋतु के आगमन का भी प्रतीक होता है। शर्दी के बाद वसंत ऋतु के आने से प्रकृति में काफ़ी बदलाव नज़र आते हैं। हर जगह आपको नए नए फूल और पत्ती दिखायी पड़ती है। इसलिए वसंत ऋतु को प्रेम, रंगों और खुशियों का ऋतु भी माना जाता है।

सामाजिक समरसता का प्रतीक

होली का त्यौहार सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है। इस त्यौहार पर सभी लोग एक दूसरे के साथ रंगों से खेलते हैं और अपनी खुशियां साझा करते हैं। यहाँ कोई गरीब या धनी की भेदभाव नहीं करता है। सभी साथ मिलकर रंगों का त्यौहार होली मिलकर मनाते हैं।

होली का महत्व (Importance of Holi)

होली का त्यौहार बहुत महत्वपूर्ण है। यह त्यौहार हमें बुराई पर अच्छाई की जीत, वसंत ऋतु के आगमन और सामाजिक समरसता का संदेश देता है। होली का त्यौहार हमें जीवन में खुशियां और रंगों का महत्व भी सिखाता है।

होली का त्यौहार भारतीय संस्कृति में बेहद महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह त्यौहार बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न तो है ही, साथ ही यह वसंत ऋतु के आगमन का भी प्रतीक है। होली लोगों के बीच भेदभाव मिटाकर भाईचारे और प्रेम की भावना को मजबूत करती है। इस दिन लोग पुराने गिले-शिकवे भुलाकर, रंगों से सराबोर होकर एक नए उत्साह के साथ जीवन जीने का संदेश देते हैं।

वहीं भक्त प्रह्लाद और होलिका की कहानी हमें अच्छे कर्म करने की प्रेरणा देते हैं। आज के समय में भी बुराई का पथ आसान होता है लेकिन अंत में सच्चाई की ही जीत होती है। होली लोगों को सच्चे और ईमानदार होने के गुण पर विश्वास करने और बुराई से लड़ने में भी मदद करती है।

होली का पर्व ऐसे समय में होता है जब लोग आमतोर से आलसी हो जाते हैं। ऐसा शायद इसलिए क्यूँकि उस समय वातावरण में ऋतु की बदलाव होती है। ठंड से सीधा गर्मी शुरू होने लगती है। ऐसे में इस प्रकार के पर्व से लोगों के बीच में पुनः उत्साह जागृत होता है और वो फिर से मेहनत करने के लिए तैयार हो जाते हैं।

वहीं इस समय हमारे शरीर में काफ़ी सारे कीटाणु का भी जन्म होता है जो की आगे चलकर हमें बीमार कर सकते हैं। वहीं लेकिन इस समय होलिका दहन का उत्सव मनाया जाता है, जिसमें हम अग्नि के चारों तरफ़ गोल गोल घूमते हैं यानी की परिक्रमा करते हैं। ऐसा करने पर गर्मी से हमारे शरीर में महजूद परजीवी सभी मारे जाते हैं और हमारा देह फिर से शुद्ध हो जाता है।

होली कैसे मनाते हैं?

होली का त्यौहार मुख्य रूप से दो दिनों तक मनाया जाता है। पहले दिन को होलिका दहन और दूसरे दिन को रंगवाली होली कहा जाता है।

होलिका दहन

होलिका दहन के दिन, लोग आस पास से लकड़ी और गोबर के ढेर को इकट्ठा करते हैं और उसमें आग लगाते हैं। इस आग को होलिका दहन कहा जाता है। यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

रंगवाली होली

रंगवाली होली के दिन, लोग पहले से रंग बनाकर रखते हैं। वहीं एक-दूसरे पर रंग, पानी और गुब्बारे फेंककर खेलते हैं। इस दिन, लोग अपने घरों में विशेष व्यंजन भी बनाते हैं और अपने परिवार और दोस्तों के साथ खुशियां मनाते हैं।

पकवान खाते हैं

इस त्योहार के समय में सभी के घरों में तरह तरह के पकवान बनाए जाते हैं। वहीं होली रंग खेल लेने के बाद सभी एक साथ मिलकर सभी पकवानों का लुफ़्त उठाते हैं।

भारत के विभिन्न हिस्सों में होली की परंपराएं

भारत के अलग-अलग हिस्सों में होली मनाने की परंपराओं में भी कुछ विभिन्नताएं हैं। आइए कुछ प्रसिद्ध क्षेत्रीय परंपराओं के बारे में जानें:

लट्ठमार होली

उत्तर प्रदेश के मथुरा और बरसाना में, होली एक अनोखे अंदाज में मनाई जाती है। यहां महिलाएं “लट्ठ” (छड़ियों) से पुरुषों पर मज़ाकिया प्रहार करती हैं जबकि पुरुष ढाल लेकर अपनी सुरक्षा करने की कोशिश करते हैं। इस प्रसिद्ध परंपरा के साथ राधा कृष्ण के दिव्य प्रेम की कहानी भी जुड़ी हुई है।

बंगाल में होली

बंगाल में होली को “डोल जात्रा” के नाम से जाना जाता है। यहां भगवान कृष्ण और राधा को भव्य झांकियों और पालकियों में बिठाकर जुलूस निकाला जाता है और लोग भक्ति गीत गाते हुए इस उत्सव का हिस्सा बनते हैं।

होली के गीत

होली से जुड़े कई प्रसिद्ध पारंपरिक गीत हैं, जो पीढ़ियों से गाए जाते रहे हैं। “रंग बरसे भीगे चुनर वाली” और “होली खेले रघुबीरा अवध में” जैसे गीत होली के माहौल को और भी रंगीन बना देते हैं। इन होली के गीत को पिड़ी दर पिडी गया जाता है जिससे की हमारे सनातन की परम्परा बनी रहे।

होली से जुड़ी पौराणिक कथाएं (Mythological Stories Related to Holi)

होली से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं हैं, जिनमें से कुछ मुख्य कथाओं के बारे में हम जानेंगे :

1. प्रह्लाद और होलिका की कहानी

यह कहानी भक्त प्रह्लाद और उनकी दुष्ट बुआ होलिका की है। ये तो आप जानते होंगे की प्रह्लाद भगवान विष्णु के परम भक्त थे, लेकिन वो असुर कुल में जन्मे थे। इस बात से उनके पिता असुर हिरण्यकश्यप को काफ़ी नाराज़गी थी। वहीं उनके बुआ होलिका को भी भक्त प्रह्लाद की भगवान विष्णु जी की भक्ति करना पसंद नहीं थी।

उनकी बुआ होलिका को आग में न जलने का वरदान प्राप्त था। इस वरदान का ग़लत इस्तमाल करने के लिए होलिका ने प्रह्लाद को आग में डालकर भस्म करने का प्रयास किया, लेकिन प्रह्लाद की भक्ति से प्रसन्न, भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद बच गए और होलिका जल गई। इसलिए होली में होलिका दहन एक महत्वपूर्ण रश्म है।

2. हिरण्यकश्यप का नरसिंह अवतार द्वारा वध

पौराणिक प्रचलिच कथा के अनुसार, भक्त प्रह्लाद भगवान विष्णु के बहुत बड़े भक्त थे। उनके पिता हिरण्यकश्यप को अपने बेटे की यह भक्ति बिल्कुल रास नहीं आती थी।

हिरण्यकश्यप एक दैत्य राजा था, जो अपनी शक्ति के कारण अहंकारी हो गया था। उसने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति करने से मना किया लेकिन प्रह्लाद जी ने उनकी बात नहीं मानी। हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को मारने के कई प्रयास किए, लेकिन हर बार भगवान विष्णु जी ने प्रह्लाद की रक्षा की।

अंत में, जब हिरण्यकश्यप का पाप काफ़ी ज़्यादा हो गया तब भगवान विष्णु जी ने नरसिंह भगवान का अवतार लिया, जो दिखने में आधा मनुष्य और आधा सिंह थे।

भगवान नरसिंह ने हिरण्यकश्यप को अपनी जांघों पर रखकर, न तो घर के अंदर और न ही बाहर, न तो दिन में और न ही रात में, न ही अस्त्र से और न ही शस्त्र से, अपने नाखूनों से उसका वध कर दिया।बुराई पर अच्छाई की जीत और शक्ति पर भक्ति की विजय के रूप में होली का पर्व मनाया जाता है।

3. राधा-कृष्ण से जुड़ी कथा

राधा-कृष्ण से जुड़ी कथा भी काफ़ी लोकप्रिय है। मान्यताओं के मुताबिक, भगवान कृष्ण का रंग सांवला था और राधा रानी दिखने में गोरी थीं। इस बात को लेकर अक्सर कान्हा अपनी मईया यशोदा से शिकायत किया करते थे कि वह गोरे क्यों नहीं हैं।

इसके बाद एक दिन यशोदा जी ने भगवान कृष्ण को कहा कि जो तुम्हारा रंग है उसी रंग को तुम राधा के चेहरे पर भी लगा दो फिर तुम दोनों का रंग एक जैसा हो जाएगा। फिर क्या था कृष्ण जी ने अपनी मित्र मंडली ग्वालों के साथ राधा को रंगने के लिए उनके पास पहुंच गए। बाल कृष्ण ने अपने मित्रों के साथ मिलकर राधा और उनकी सखियों को जमकर रंग लगाया।

कहते हैं कि तब से ही रंग वाली होली की परंपरा शुरू हुई। आज भी मथुरा में भव्य और धूमधाम तरीके से होली खेली जाती है।

4. शिवजी से जुड़ी कथा

कुछ मान्यताओं के मुताबिक पार्वती जी ने शिव जी से विवाह करने के लिए कठोर तपस्या की। उसी समय, राक्षस ताड़कासुर का धरती पर काफ़ी आतंक था और वहीं उसका वध केवल शिव जी के पुत्र द्वारा ही संभव था। ऐसे में देवताओं ने कामदेव को शिव जी की तपस्या भंग करने के लिए भेजा।

धरती की रक्षा करने के लिए कामदेव जी ने शिव जी पर पुष्प बाण चलाया, जिससे उनकी तपस्या भंग हो गई। परिणाम स्वरूप क्रोधित शिव जी ने कामदेव को भस्म कर दिया। अपने पति की इस दुर्दशा देख, रति ने अपने पति को पुनर्जीवित करने की प्रार्थना की।

शिव जी ने रति को अपने पति के पुनर्जीवन का वरदान दिया और साथ ही पार्वती जी से विवाह करने के लिए तैयार हो गए। देवताओं ने इस विवाह को फाल्गुन पूर्णिमा के दिन उत्सव के रूप में मनाया।

होलिका दहन (Holika Dahan) क्यों किया जाता है?

होलिका दहन करने के पीछे भी कुछ सामाजिक और वैज्ञानिक कारण छुपे हुए हैं। होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह भक्त प्रह्लाद और दुष्ट होलिका की कहानी से जुड़ा हुआ है। होलिका दहन में, हम बुराई (होलिका) का नाश और अच्छाई (प्रह्लाद) की रक्षा का जश्न मनाते हैं। यह त्यौहार हमें सिखाता है कि अंत में सच्चाई हमेशा जीतती है।

इसका एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी है, जिसमें ये तथ्य है की इस समय जब मौसम में इतना बदलाव देखा जाता है ऐसे में वातावरण के साथ-साथ शरीर में बैक्टीरिया के विकास होने लगता है। जब होलिका दहन की रसम की जाती है तब आग का तापमान लगभग 145 डिग्री फारेनहाइट तक बढ़ जाता है। परंपरा का पालन करते हुए जब लोग आग के चारों ओर परिक्रमा (परिक्रमा या चारों ओर घूमना) करते हैं, तो आग की गर्मी शरीर में विकसित हो रहे बैक्टीरिया को मार देती है, जिससे यह साफ हो जाता है।

यही कारण है की होलिका दहन आख़िर होली के समय में क्यूँ किया जाता है।

होली में बनने वाले पकवान?

भारत के त्यौहार अपने अलग अलग पकवान के लिए भी ज़्यादा जाने जाते हैं। ऐसे में होली पर भी कुछ विशेष पकवान बनते हैं! होली के लिए भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में तरह-तरह के स्वादिष्ट व्यंजन तैयार किए जाते हैं। यहाँ कुछ लोकप्रिय पकवानों के बारे में जानते हैं:

पकवानविवरण
गुजियामीठी गुजिया उत्तर भारत में होली के दौरान एक पारंपरिक मिठाई के तौर पर खासतौर से बनाई जाती है। खोया, सूखे मेवे, और चीनी से भरी यह मिठाई त्योहार की मिठास को और भी बढ़ा देती है।
मालपुआमालपुआ भी एक प्रकार की मिठाई है, जिसे मैदा या सूजी के घोल में डुबोकर चाशनी में पकाया जाता है। इसे अक्सर रबड़ी के साथ परोसा जाता है। खाने में ये काफ़ी स्वादिष्ट होता है।
ठंडाईठंडाई होली का एक अनिवार्य पेय है। यह ठंडा दूध-आधारित पेय सूखे मेवे, मसाले और कभी-कभी भांग के साथ होता है जो ठंडक और त्योहार का नशा देने वाला होता है। इस पीने के बाद ही रंगो का असली मज़ा आता है।

Eco-friendly Holi कैसे मनाए (पर्यावरण के अनुकूल होली)

हाल के वर्षों में, पर्यावरण जागरूकता और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के चलते Eco-friendly त्योहार मनाने पर अधिक बल दिया जाने लगा है। आइए देखें कि हम किस तरह होली को भी Eco-friendly तरीक़े से मना सकते हैं:

प्राकृतिक और हर्बल रंगों का उपयोग

बाजार में मिलने वाले कई रंगों में हानिकारक chemicals (रसायन) होते हैं। हम इसके बजाय फूलों, हल्दी, चुकंदर जैसे प्राकृतिक उत्पादों से बने रंगों का उपयोग करें। ये त्वचा और पर्यावरण दोनों के लिए एक सुरक्षित विकल्प हैं।

जल संरक्षण

ये देखा गया है की होली में अक्सर ढेर सारा पानी बर्बाद होता है। इस जल संकट के समय में, पानी को समझदारी से उपयोग करने की ज़रूरत है। हमें बाल्टी या बड़े बर्तनों के स्थान पर छोटे बर्तन जैसे की पिचकारी का उपयोग करना चाहिए। वहीं यदि सम्भव हो सके तो कोशिश करें ‘सूखी होली‘ खेलने की।

कचरा प्रबंधन

होली पर जश्न के बाद प्लास्टिक, रंगों के पैकेट, आदि का कचरा बहुत निकलता है। अपने हिस्से के कचरे को सही जगह पर डालने की जिम्मेदारी उठाएं। वहीं हो सके तो इस कचरे को अलग अलग छांट कर रीसाइकल करने में लगाएं। वहीं हम दुकान से plastic packet के स्थान पर कपड़े में या फिर काग़ज़ के पैकेट में रंग ला सकते हैं।

होली का वैज्ञानिक महत्व

होली के उत्सव में सिर्फ धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहलू ही नहीं हैं, कुछ वैज्ञानिक पहलू भी जुड़े हैं। चलिए इसके ऊपर रोशनी डालते हैं।

ऋतु परिवर्तन

होली वसंत ऋतु के प्रारंभ में आती है, ठीक उस समय जब मौसम में परिवर्तन होता है। इस दौरान वातावरण में मौजूद बैक्टीरिया बढ़ने लगते हैं। होलिका दहन और वातावरण में बिखेरे जाने वाले प्राकृतिक रंगों के धुएं के कुछ एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं जो की एक तरह से पर्यावरण को साफ़ करने का काम करते हैं।

मानसिक स्वास्थ्य

होली एक सामाजिक त्यौहार है जो लोगों को जोड़ने, हंसी-खुशी और रंगों के माध्यम से तनाव मुक्त होने का अद्भुत अवसर देता है। यह उत्सव मानसिक स्वास्थ्य के लिहाज से बहुत अच्छा माना जाता है। जहां आज मानसिक स्वास्थ्य को लेकर लोग काफ़ी चिंतित हैं ऐसे में होली का त्योहार उन्हें इस परेशानी में काफ़ी मदद करने में सक्षम है।

होली की असली सच्चाई क्या है?

होली की असली सच्चाई बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। जहां पर भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लिया था और होलिका का वध किया था

होली के देवता कौन है?

होली के देवता राधा और कृष्ण जी हैं।

सारांश

उम्मीद है कि आपको ये समझ आ गयी होगी की होली क्यों मनाया जाता है? होली केवल एक रंगों का त्योहार ही नहीं है, ये हमें एक दूसरे के साथ भाईचारे से रहने की भी प्रेरणा देता है। यह होली का पर्व हमें बुराई पर अच्छाई की जीत की याद भी दिलाता है।

ये भी सिखलाता है की हमारे जीवन में दोस्ती, प्यार का होना क्यूँ ज़रूरी है। सभी दुःख कष्ट को भुलाकर हम हमेशा ही नयी शुरूवात फिर से कर सकते हैं। यह आर्टिकल पसंद आयी हो तो अपने दोस्तों के साथ इसे share ज़रूर करें। तो इस बार के लिए आप सभी को एक रंगीन, सुरक्षित, और जोश से भरी होली की सुभकामनाएँ!